जवानी का ‘ज़हरीला’ जोश-3

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मेरी गांडू कहानी के दूसरे भाग
जवानी का ‘ज़हरीला’ जोश-2
में अब तक आपने पढ़ा कि पुलिसवाले को पटाने में नाकामयाब होने के बाद मैंने यूरीनल में मिले अंकल को अपना लंड चुसवाया और गांव जाते समय टैम्पो वाले भैया को उत्तेजित करके उसके लंबे मोटे लंड को हाथ में ले लिया था लेकिन वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरे गांव के बाहर मुझे छोड़कर चला गया।

अगले दिन सुबह जल्दी उठकर मैं ऑफिस चला गया। वैसे तो ऑफिस में मैं स्ट्रेट बनकर ही एक्ट करता था। टेलेंट की भी कमी नहीं थी। अपनी प्रोसेस का टॉप सेल्स एक्जीक्यूटिव था। एलईडी पर हफ्ते में 4 दिन मेरा ही नाम फ्लैश होता था।

हर कंप्यूटर सिस्टम का अगल केबिन बना हुआ था। एक रॉ में 6 केबिन बने हुए थे यानि कि 6 लोग एक रॉ में बैठते कॉलिंग के लिए। दो सिस्टम के बीच में पार्टीशन रहता था लेकिन साथ वाले सिस्टम की स्क्रीन आसानी से दिखाई देती थी। नीचे सीपीयू नीचे रखा रहता था जिस पर पैर लगते रहते थे। पैर लगने के कारण या तो सिस्टम बंद हो जाता था या और कोई गड़बड़ी आ जाती थी।
मेरे ऑफिस में ही एक लड़का था भूषण… वो मेरे साथ वाली सीट पर ही बैठता था बिल्कुल मेरी बगल में।

वो शरीर से बहुत ज्यादा फिट नहीं था लेकिन उसको मोटा भी नहीं कह सकते थे क्योंकि हाइट भी करीब 6 फीट के करीब थी। बस पेट थोड़ा बाहर निकला हुआ था। रंग बिल्कुल गोरा। नया-नया जवान हो रहा था। शहरी लड़का था, गाल गोरे, होंठ लाल और हल्की-हल्की ट्रिम्ड दाढ़ी रखता था। उसकी गांड काफी मोटी थी।

जब सिस्टम में कोई गड़बड़ी हो जाती और वो उसको ठीक करने के लिए चेयर पर बैठे-बैठे नीचे की तरफ झुकता तो टी-शर्ट ऊपर उठने के कारण उसकी गांड की दरार दिखाई देने लगती। गांड भी गोरी थी और उस पर हल्के बाल भी थे। लेकिन मेरा इरादा गांड देखने का नहीं बल्कि ये होता था कि उसने अंडरवियर किस ब्रांड का पहना हुआ है। मेरी हमेशा ये फैंटेसी होती थी कि मैं लड़कों के अंडरवियर स्ट्रिप को देख पाऊं।

भूषण ने उस दिन जॉकी का ब्लैक अंडरवियर पहना हुआ था। उस दिन पहली बार मेरा ध्यान उसकी तरफ गया था। इससे पहले मैंने उसको कभी उस नज़र से नहीं देखा था। गे होने का सबसे बड़ा ड्रॉबैक यही होता है कि कितना भी कंट्रोल करने की कोशिश करो मन कभी न कभी भटक ही जाता है। और उस पर किसी से खुलकर बात भी नहीं कर सकते।

भूषण देखने में काफी हैंडसम लड़का था बस मुझे उसके हल्के बाहर निकले पेट के कारण उसके साथ कभी कुछ करने का मन नहीं हुआ। उस दिन जब मेरा ध्यान उसके अंडरवियर पर गया और अंदर से उसके गोरे बदन पर गया जिस पर हल्के बाल भी थे तो उस दिन के बाद मैं उसकी तरफ आकर्षित होना शुरू हो गया था।

वो अक्सर मेरे बगल वाली सीट पर ही बैठता था। एक दिन की बात है जब भूषण ने प्रिंट वाला ब्लैक हाफ बाजू का टी-शर्ट पहना हुआ था। उसकी बाइसेप्स भी नॉर्मल ही शेप के थे। वो जिम वगैरह नहीं जाता था शायद इसलिए बाजुओं में कहीं कोई कट नहीं था। लेकिन हाफ बाजू वाले टी-शर्ट में उसके गोरे हाथ काफी अच्छे लग रहे थे। उस पर हल्के बाल भी थे। उसके शरीर को देखता अंदाज़ा हो रहा था कि वो करीब 20वें साल में होगा।

उस दिन कॉलिंग करते हुए वो अपनी चेयर पर घुटने के बल खड़ा हो जा रहा था। जब मेरा ध्यान गया तो उसका टी-शर्ट आगे से भी ऊपर उठा हुआ था और उसकी जॉकी की स्ट्रिप उसकी नाभि के करीब तक पहुंचने वाली थी जिसके कारण उसका आधा अंडरवियर पैंट के बाहर साफ-साफ दिखाई दे रहा था। जैसे ही मेरा ध्यान गया मैं उसको देखता ही रह गया।

उसका बदन बहुत ही ज्यादा आकर्षित करने वाला था। पेट पर भी हल्के बाल थे। और जॉकी के अंडरविरयर की स्ट्रिप के नीचे ये अंदाज़ा भी मुझे हो रहा था कि उसके झांट भी यहीं से शुरु हो रहे हैं। झांट दिखाई तो नहीं दे रहे थे लेकिन झांटों वाले भाग के ऊपर ध्यान से देखने पर दिखाई दिया कि कुछ सफेद-सफेद पदार्थ के धब्बे बने हुए हैं। वो नज़ारा देखकर मैं उसे देखता ही रह गया। एक तो उसका बदन इतना गोरा और जवान था और ऊपर से उसके वीर्य के निशान उसके ब्लैक अंडरवियर पर।

मैं बार-बार खुद को उसकी तरफ देखने से रोक नहीं पा रहा था। उसको भी लगने लगा था कि मैं आज बार-बार उसकी तरफ देख रहा हूं। लेकिन मैं पूरी कोशिश कर रहा था उसको ये पता न चले कि मेरा इरादा क्या है। उस दिन पहली बार भूषण मुझे अच्छा लगने लगा। हालांकि अब इस बारे में सोचता हूं तो मुझे अच्छी तरह पता है कि वो महज़ एक फिज़िकल अट्रैक्शन था। क्योंकि सामने का नज़ारा ही ऐसा था। गोरा बदन, पेट के निचले हिस्से पर हल्के बाल और बालों के नीचे उसके जॉकी के काले अंडरवियर पर वीर्य का सफेद निशान।

आज भी उस नज़ारे को याद करके लंड खड़ा हो जाता है। मैं भूषण को नंगा देखना चाहता था। खासकर उसके आगे वाले जिस्म को। अब मुझे वो बहुत सेक्सी लगने लगा था। लेकिन ऑफिस वाला बंदा है अगर कुछ गड़बड़ हो गई तो इस बात का डर भी था साथ में। किंतु जब हवस की हवा चलती है अच्छे-अच्छे मजबूत इरादे वाले सूरमाओं को अपने साथ उड़ा ले जाती है।

एक दिन भूषण लंच करने के बाद वॉशरूम की तरफ जा रहा था। मैं तो उसी की ताक में रहता था कि कुछ और देखने को मिले।
मैं उसके पीछे-पीछे चल दिया। उसने पहले तो हाथ धोए और फिर टिश्यू पेपर से पौंछा। उसके बाद वो बाहर निकलने लगा लेकिन कुछ सोचकर वापस अंदर की तरफ आया और यूरीनल की तरफ बढ़ा।
मैं तो मौके की तलाश में था ही, उसके साथ वाले पॉट पर ही खड़ा हो गया, सीधे-सीधे उसका लंड नहीं देख सकता था इसलिए बात छेड़ दी टीम लीडर के बारे में। टीम लीडर की चुगली करनी शुरू कर दी क्योंकि भूषण भी हमारे टीम लीडर को पसंद नहीं करता था।

बातों-बातों में मैं नीचे झांकने की कोशिश कर रहा था और उसके हाथ में मुझे उसका लंबा सा लंड दिखाई दे ही गया। लंड देखते ही दिल की धड़कन बढ़ गई। हाय… ये भूषण का लंड है। कितना मस्त है यार… लंड का रंग भी मेरे लंड की अपेक्षा काफी गोरा था। लेकिन उसके चेहरे की तुलना में सांवला ही कहा जाएगा।

उसका लंड देखकर मेरा तो वहीं पर खड़ा होना शुरू हो गया। मैं उसको इस बात की भनक नहीं लगने देना चाहता था कि मैं उसका लंड देख रहा हूं।

2 मिनट तक हम वहीं खड़े होकर बात करते रहे और मैंने इस बीच कई बार उसके लंड के दर्शन किए।

भूषण देखने में तो हैंडसम था ही आज मैं उसका लंड भी देख चुका था। अब उसके लिए प्यार वाली फीलिंग आनी शुरू हो गई थी। जबकि वो प्यार नहीं था इस बात का अंदाज़ा अब मुझे आसानी से हो जाता है। लेकिन उस वक्त उम्र ही ऐसी थी कि लव और लस्ट में फर्क समझ नहीं आता था।

मैं भूषण को ही देखता रहता, उसी के साथ लंच करने की कोशिश करता। वो मुझे देखकर स्माइल कर देता तो मेरा दिन ही बन जाता था। मैं पागल ये भूल गया था कि वो एक स्ट्रेट लड़का है और मैं गे। वो मुझसे भला प्यार कैसे कर सकता है। लेकिन उस वक्त जो भी हो रहा था बहुत मज़ा आ रहा था। अब मेरा ऑफिस जाने का मकसद सैलरी नहीं भूषण बन गया था।

मुझे उससे बातें करना, उसको हंसते हुए देखना, पैंट के अंदर उसके लंड वाले हिस्से की तरफ ताड़ने में जो मज़ा आता था वो बस अलग ही था। उसके लाल होंठ, काले बाल, गोरे गाल… अट्रैक्शन हर दिन बढ़ता ही जा रहा था।

उस वक्त तक मोबाइल फोन भी चलन में आ गए थे। लेकिन फीचर फोन ही आए थे। मैंने उसका नम्बर भी ले लिया था। रोज़ उसके पास मैसेज भेजता रहता था। कोशिश करता था कि किसी तरह उसको मन की बात बताने का मौका मिले।

एक दिन मैंने-मैंने मैसेज के एंड में उसको आइ लव यू लिख कर भेज दिया। कुछ देर बाद उसका कॉल आया और उसने पूछा तूने ये क्या लिखा है- आइ लव यू…
मैंने बात बनाते हुए बोल दिया कि ऐसे ही फ्रेंड करके लिख दिया यार…
सुनकर वो हंसने लगा और कुछ देर बात करने के बाद उसने फोन डिसकनेक्ट कर दिया।

उस दिन मुझे बड़ी खुशी हुई कि बहाने से ही सही उस तक मन की बात पहुंच तो गई। अगले दिन जब मैं ऑफिस पहुंचा तो वो मेरे साथ नहीं बैठा। मुझे लगा कहीं इसको शक तो नहीं हो गया कि मैं गे हूं।

फिर खुद ही मन को समझाया कि बी पॉजिटिव प्रवेश… हो सकता है टीम लीडर ने उसको दूसरी जगह बैठा दिया हो या कुछ और रीज़न रहा हो। वो मुझसे 4 रॉ पीछे बैठा था। बीच-बीच में मैं पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखता था लेकिन एक नज़र देखने के बाद वापस गर्दन घुमा लेता था क्योंकि फ्लोर पर और भी लोग थे और मैं नहीं चाहता था कि किसी को शक हो कि मैं गे हूं और भूषण को ऐसी नज़र से ताड़ रहा हूं।

गे होने में उस दिन मुझे पहली बार घुटन महसूस हो रही थी। अगर किसी को पसंद करते हैं तो खुलकर देख भी नहीं सकते। क्योंकि आपके आस-पास के लोगों में आपका मज़ाक न बन जाए इस बात का डर लगा रहता है। इससे पहले मैं अपने गे होने को लेकर काफी पॉजिटिव रहता था और बड़ा कॉन्फिडेंट था कि जिंदगी को अपने तरीके से ही जीऊंगा लेकिन समाज में रहते हुए अब लगने लगा था कि राह इतनी आसान नहीं है। खासकर तब जब आप अपने वर्कप्लेस पर ही किसी को पसंद करते हो।

तीन दिन हो गए भूषण मेरे साथ नहीं बैठ रहा था। मुझे अब थोड़ा डाउट होने लगा कि वो जान-बूझकर तो ऐसा नहीं कर रहा है। लेकिन फिर भी मैं मन को दिलासा देता रहा कि ऐसा नहीं हो सकता, उसको मुझसे क्या प्रॉब्लम हो सकती है।

इस तरह सोचते-सोचते पूरा हफ्ता निकल गया लेकिन वो मेरे साथ नहीं बैठा। अब मेरा शक यकीन में तब्दील होना शुरू हो गया था।
मैं सोच रहा था कि वो ‘आई लव यू’ वाला मैसेज उसको ना ही भेजता तो अच्छा था, कम से कम वो मेरे पास तो बैठ रहा था। इन सब बातों के कारण मेरी परफॉर्मेंस भी डाउन होने लगी थी। भूषण का दूर जाना और टीम लीडर का सिर पर चढ़ना, अंदर फ्रस्ट्रेशन पैदा होने लगी।

एक दिन की बात है। जब भूषण वॉशरूम में था और मैं भी। उस दिन की तरह वो यूरीनल पॉट पर खड़ा था। मैं भी साथ वाले पॉट पर खड़ा होकर पेशाब करने लगा। आज पता नहीं मेरे मन क्या आया मैं उसके सामने ही उसके लंड को घूरने लगा।
वो भी देख रहा था कि मैं उसके लंड को देख रहा हूं। मुझे उसका लंड घूरते देखकर उसने पूछ ही लिया- क्या देख रहा है?
मैंने भी कह दिया- तेरा देख रहा हूं।
उसने कहा- चूसेगा?

यह कहते-कहते उसका लंड आधा खड़ा हो चुका था। मैंने भी खुद को नहीं रोका क्योंकि जब किसी से दूरी बढ़ती है उसको पाने के लिए इंसान अच्छे बुरे की परवाह किए बिना आगे बढ़ता चला जाता है। मैंने कह दिया- हां, मैं तो बहुत दिनों से चाह रहा था।
उसने कहा- चल फिर अंदर आ जा..

हम टॉयलेट में घुस गए उसने जिप खोली और अपना लंड मेरे सामने निकालकर खड़ा हो गया। मुझ पर भी हवस सवार थी, मैंने भी पल की देरी किए बिना उसके लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगा।
उसकी सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह्ह… साले… मुझे शक तो पहले से ही था तुझ पर! चूस… यार… मज़ा आ रहा है।
उसने फॉर्मल पैंट की फ्लाई खोल दी और अंडरवियर समेत जांघों तक नंगा हो गया। वो प्यूबिक हेयर वाले एरिया से और भी सेक्सी निकला। उसका रंग तो गोरा था ही, उसके झाट भी काले, घने और बड़े-बड़े थे। और झाटों के बीच से निकल रहा था उसका लंड जो मेरे मुंह में जाने के बाद तन कर काफी लंबा हो गया था।

उसकी टोपी गाजरी रंग की थी और गोलियां भी अच्छी थीं। मैं उसके लंड को मज़े लेकर चूसने लगा। उसके हाथ मेरे सिर पर आ गए। अब वो मेरे मुंह में लंड अंदर-बाहर करने लगा। लंड लंबा था और गले तक फंस रहा था लेकिन चूसने में मज़ा भी आ रहा था। उसके झाटों से साबुन या शैम्पू की हल्की महक भी आ रही थी।

वो तेज़ी से लंड को मुंह में अंदर बाहर करने लगा। मेरे हाथ उसकी गांड पर जाकर टिक गए थे। गांड काफी नरम थी। मैं उसकी गांड की दरार में उंगली डालकर उसकी गांड की गर्मी को फील करना चाह रहा था लेकिन उसने मेरा हाथ हटवा दिया। वो तेज़ी से मेरे मुंह में लंड को पेल रहा था।

3-4 मिनट तक जबरदस्त चुसाई चली और उसने लंड बाहर निकाल लिया। उसने माथे पर से मेरे बाल पकड़कर मेरी गर्दन थोड़ा पीछे की ओर कर दी और एक हाथ में अपना लंड पकड़कर मुट्ठ मारने लगा, उसके लंड का लाल हो चुका टोपा ठीक मेरी नाक की सीध में था। कुछ सेकेण्ड्स तक उसने लंड को ज़ोर से मुट्ठ मारते हुए रगड़ा और एका-एक वीर्य की गर्म धार मेरी नाक से टकरा गई, दूसरी पिचकारी आंख में जा लगी, मेरी आंखें बंद हो गईं और उसने मेरे पूरे चेहरे को अपने वीर्य से सान दिया। कुछ वीर्य होठों पर लगा होने के कारण उसका स्वाद अंदर मुंह में भी चला गया। वो हैंडसम भूषण का वीर्य था… यह सोचकर मैंने उसका स्वाद लेना जारी रखा।

मुझे उसी हालत में वहां बैठा छोड़कर वो तो बाहर निकल गया। लेकिन मेरी वासना तो भड़की हुई थी। उसके साथ हुए इस कामुक कार्य के अहसास में बहकर मैं सने हुए मुंह के साथ ही खड़ा हुआ और अपने लंड को निकालकर मुट्ठ मारने लगा। इतने दिनों के बाद जो सपना पूरा हुआ था उसको जीना चाह रहा था। मैंने अपना लंड हिलाना शुरु किया और जहां 5 मिनट में मेरा छूटता था आज एक ही मिनट में लंड ने वीर्य निकाल दिया। इतना पसंद था भूषण मुझे।

और आज तो उसने अपना लंड मुझे ना सिर्फ चुसवा दिया था बल्कि जो वीर्य मैंने उसके अंडरवियर पर लगा हुआ देखा था, वही सफेद वीर्य आज मेरे चेहरे पर फैला था। इस बात को सोचकर मन ही मन मैं तृप्ति का अनुभव कर रहा था क्योंकि जिसके ख्वाब मन देखना शुरू कर देता है अगर वो मिल जाए तो उत्तेजना और वासना कई गुना बढ़ जाती है।

जब मेरा वीर्य झड़ चुका तब मैंने भी पैंट की जिप बंद की और रूमाल से चेहरा पोंछा और बाहर आकर मुंह धोकर खुद को ठीक-ठाक किया। उस दिन लंच के बाद भूषण मुझे दिखाई नहीं दिया। मैंने अपने कलीग्स से पूछा तो पता चला वो हाफ डे लेकर चला गया है।

मैंने भी किसी तरह वो दिन काटा। रात को उसे मैसेज किया लेकिन मैसेज डिलीवर नहीं हुआ। मैंने सोचा कल उससे बात करता हूं..
कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
himbajanshu@gmail.com


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