दीदी की चुदाई का मजा लिया चूत चोद कर

दीदी की चुदाई की यह सेक्सी कहानी है मेरी और मेरी बुआ की लड़की की…
यह उन दिनों की बात है जब मैं कॉलेज में था। तब मुझे सेक्स के बारे में कुछ पता नहीं था. मैं तब 19 साल का था, बस दोस्तों की वजह से कुछ बातें जान गया था.

एक बार मेरे कूल्हे पर बड़ा सा फोड़ा हुआ, जिसके कारण मैं चल नहीं सकता था, न ही बैठ सकता था. एक हफ्ते तक मैं घर पर ही रहा था. माँ मुझे हर रोज किसी पेड़ का पत्ता तेल में गर्म करके कूल्हे पर लगाती थी जिससे मुझे थोड़ा आराम मिलता था.

मेरी बुआ मेरे गाँव में ही रहती थी, उनकी लड़की प्रिया मेरे से 4 साल बड़ी थी, मस्त माल थी वो, बड़ी बड़ी चुची, मस्त गांड… पर मैंने कभी उसे सेक्सी नजर से देखा नहीं था।
मैं बीमार था इसलिए वो मुझे देखने मेरे घर आई थी.

दोपहर का टाइम था तो मेरे दवाई लगाने का टाइम हो गया था। माँ ने दवाई बना के रखी थी, लेकिन उसको कहीं बाहर जाना था तो उसने प्रिया को दवाई लगाने कहा।
मैंने माँ से कहा- माँ, मैं दीदी से दवाई नहीं लगवाऊँगा, मुझे शर्म आती है।

इस बात पर माँ और प्रिया दीदी जोर जोर से हंसने लगी. माँ बोली- अरे दवाई तो लगा रही है, इसमें शर्म कैसी?
मुझे मजबूरन दवा लगाने के लिए राजी होना पड़ा।

माँ जाने के बाद मैं बेड पर पेट के बल लेटा हुआ था। थोड़ी देर में दीदी दवाई लेकर आई.
मुझे अभी भी शर्म आ रही थी इसलिए मैंने अपना मुँह तकिये के नीचे दबाया हुआ था.
दीदी बोली- अरे अनु ऐसे क्या शरमा रहा है?
मैं बोला- दीदी, मैं कभी किसी लड़की के सामने नंगा नहीं हुआ!

दीदी फिर से हंसने लगी बोली- अरे सिर्फ बरमूडा ही उतार दे… और दीदी के सामने कैसी शर्म?
यह बोल कर दीदी ने खुद मेरा बरमूडा नीचे मेरे घुटनों तक खिसका लिया, अब मैं सिर्फ निकर पर था।

अब दीदी बेड पर मेरे पैरों के नजदीक सट कर बैठी, जिसे मैं महसूस कर रहा था।
उसने धीरे से मेरा निकर थोड़ा नीचे सरकाया जिससे मेरे दोनों कूल्हे अब नंगे थे। 2-3 दिन दवाई लगाने से फोड़ा और दर्द थोड़ा कम हो गया था।

दीदी ने पहले पानी से मेरा कूल्हा साफ किया, पानी थोड़ा ज्यादा लेने के कारण वो मेरे गोटियों तक बह गया था। दीदी हाथ में कॉटन लेकर उसे साफ़ कर रही थी। निकर ज्यादा नीचे नहीं सरकाई थी इसलिए उसे गोटियाँ दिख नहीं रही थी, वो ऐसे ही ऊपर से साफ कर रही थी.

जैसे ही उसका मुलायम हाथ मेरे गोटियों को छुआ, मेरे रोम रोम में एक बिजली सी दौड़ गई। दीदी का हाथ मैंने मेरे दोनों पैरों के बीच हल्के से दबाया। जिससे मेरी गोटियाँ उसकी हाथ में आ गई, उसने झट से अपना हाथ वहाँ से हटाया और बोली क्या हुआ? दुःख रहा है क्या?
मैं बोला- नहीं, गुदगुदी हो रही है.

अब दीदी शरमा गई, हंसने लगी.
मैं- क्या दीदी, आप हमेशा हंसती हो मेरे ऊपर!
दीदी- नहीं रे, तेरे पे नहीं, ऐसे ही!

अब दीदी ने दवाई लगाना शुरू किया, उसके हाथ के टच से में उत्तेजित हो रहा था क्योंकि किसी लड़की का स्पर्श होता है तो उफ़…
अब मेरा लंड भी हलचल मचा रहा था।

निकर ऊपर होने के कारण दवाई लगाने में कठिनाई हो रही थी, दीदी ने थोड़ा और नीचे किसका दिया, अब मेरी गोटियाँ साफ दिखाई दे रही थी, दीदी ने उन्हें देखते ही हाथ वैसे ही रख दिया कूल्हे पर और अब वो भी शर्मा रही थी. मैं भी गोटियों को धीरे धीरे छुपाने की कोशिश कर रहा था.

दीदी ने फिर से दवाई लगानी शुरू कर दी, इधर मेरा लंड धीरे धीरे मोटा हो रहा था, जिसको देख कर दीदी भी उत्तेजित हो रही थी, उसकी एक नजर मेरे कूल्हों की तरफ और एक गोटियों की तरफ थी।
अब मेरा लंड पूरा तन गया था, 6 इंच का लम्बा और 2 इंच मोटा हो गया था, अब वो मेरे दोनों टांगों के बीच से दिखाई दे रहा था।

उसे देखकर दीदी अचानक खड़ी हो गई, मैं भी घबरा गया।
मैं- क्या हुआ दी?
दी- कुछ नहीं, थोड़ा पानी पीकर आती हूँ.

यह कह कर दीदी किचन में चली गई। मैं भी घबरा गया था इसलिए निकर थोड़ी ऊपर कर ली।

दीदी आते ही बोली- अरे क्या कर रहे हो, दवाई निकर को लग जाएगी.
और अब उसने निकर पूरी घुटनों तक खिसका दी।
दीदी- दवाई तो लगा दी है, लेकिन अब पूरी फैला दी तुमने!
यह कह कर वो साफ करने लगी.

अब मेरा लंड सिकुड़ गया था, इसलिए दीदी थोड़ी नाराज लग रही थी और वो ‘च च च’ कर रही थी। अब दीदी ने धीरे धीरे मेरे चूतड़ों को सहलाना शुरू कर दिया था, जिसके कारण मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। दीदी बीच बीच में उसे हाथ लगाने की कोशिश करती।

तभी एकदम से दीदी ने मेरे लंड को पकड़ लिया।
मैं सकपका गया और उठ गया और बोला- दीदी, क्या कर रही हो?
दी बोली- अरे उसके ऊपर दवाई लग गई है, उसे साफ कर रही हूँ.
मैं- दीदी, रहने दो, मैं साफ कर लूंगा.
मैं समझ रहा था कि आज शायद मुझे दीदी की चुदाई करने को मिलेगी.

दीदी- अरे क्या शर्मा रहा है, कुछ नहीं करुँगी, और यह तेरा इतना मोटा कैसे हो गया?

मुझे समझ आ गया था कि दीदी भी अब उत्तेजित हो गई है। मेरे मना करने से भी उसने मुझे जबरदस्ती लिटा दिया और कपड़े से मेरा लंड साफ करने का नाटक करने लगी।

अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, लग रहा था कि अभी उसकी चूत में लंड डाल दूँ।
फिर से उसने हाथ में पकड़ा और मेरे लंड के सुपारे को सहलाने लगी।
मैंने फिर से बोला तो कहने लगी- अरे इसके अंदर भी लगा है।
मुझे मजा आ रहा था इसलिए चुपचाप लेटा पड़ा।

अब दीदी भी खुद के मम्मे सहलाने लगी।

थोड़ी ही देर में मेरा छूटने वाला था, मैंने दीदी से कहा- बस करो दीदी… अब कुछ तो हो जायेगा, कुछ आ रहा है अन्दर से!
दीदी- अरे वो दवाई गई थी अन्दर, वही आ रही है!
और मेरा पूरा पानी उसके हाथ के ऊपर पड़ गया।

मैं वैसे ही कुछ देर पड़ा रहा- दीदी आप गन्दी हो! मुझे पता है क्या था वो! आपके हिलाने की वजह से आया वो!
दीदी- सब पता है, फिर भी मजा ले रहा था तू!
मैं- नहीं दीदी, वो बस… कड़क हो गया था इसलिए!
दीदी- तूने किया है ऐसा कभी?
मैं- हाँ लेकिन…

दीदी- देख और भी तरीके है मजा करने के… तुम चाहो तो?
मैं समझ गया कि अब दीदी की चुदाई होगी लेकिन बोला- नहीं दीदी, यह सब गलत है.
दीदी- अब भाव मत खा… चुपचाप से तैयार हो जा!

इतने में उसने अपनी ड्रेस निकाल दी और ब्रा भी निकाल दी और मेरे से लिपट गई, उसने मेरी निकर और बरमूडा भी निकाल दिया।
यह सब इतना जल्दी हुआ कि मैं कुछ कर नहीं पाया।

जैसी ही वो मुझसे लिपटी मेरे कूल्हे का दर्द उठ गया, मैं कुछ कहता उससे पहले उसने चूमना शुरू कर दिया, सीधे लिप टू लिप… और एक हाथ से लंड और दूसरे से कूल्हा सहलाने लगी.
देखते ही देखते वो मेरे नीचे आ गई और मुझे ऊपर ले लिया।

वो जोर जोर से मेरे होंठ चूस रही थी और चबा रही थी मानो बच्चा दूध पी रहा हो। अचानक उसने मेरा लवड़ा कस कर दबाया। वो दबाना इतना उत्तेजित था कि बस मैं पागल हो गया। अब मैं शर्म और रिश्ते भुला कर टूट पड़ा, उसके बड़े बड़े मम्मे जोर जोर से दबाने लगा और चूसने लगा।
उसने भी मेरी गोटियाँ दबानी शुरू कर दी।

मैं तो आज मर ही जाता, इतना जोर से वो दबा रही थी। मुझे याद है जब क्रिकेट में बॉल लगती है तो कैसा लगता है लेकिन मुझे वो सब अच्छा लग रहा था।

अब मैंने उसकी पेंटी में हाथ डाला, पूरी झांटों से भरी थी उसकी पेंटी, उसमें हाथ घुमाने में मजा आ रहा था. उसकी चूत को मेरा हाथ लगा… पूरा गीली हो गई थी, चिपचिपा रही थी।
मैंने अपनी दोनों उंगली उसकी चूत में डाल दी. जैसे ही उंगलियाँ अन्दर गई, उसने मुझे कस के दबोचा, मेरा लंड और जोर से दबाया और अपने पैरों से मुझे पकड़ लिया।

इधर किसिंग जोरों से चालू थी मानो उसकी बहुत दिनों की प्यास आज बुझ रही हो।

दिखने में दीदी इतनी खास नहीं थी सांवली, ऊँचा कद, मगर चुची और गांड मस्त थी, उसकी उम्र ज्यादा थी, उसकी शादी नहीं हुई थी, और वो पढ़ी भी ज्यादा थी। शायद दीदी की चुदाई नहीं हुई थी अब तक… वो अभी तक प्यासी थी।

मैं दीदी की चुची पकड़ कर दबाये जा रहा था तो दूसरी ओर चूत की मालिश चालू थी। ऐसी जवानी मैंने ब्लू फिल्म में भी नहीं देखी थी।
अब उसने मुझे इशारा करके उल्टा होने को कहा 69 जैसे!
दीदी बोल रही थी- अब इसकी अन्दर की दवाई सब निकालती हूँ और लंड को मुँह में लेकर उसको चूसने लगी, उसका तरीका सही था। वो चूसती कम खींचती ज्यादा थी और काटती भी थी।

मैंने भी जोश में आकर उसकी चूत काटना शुरू किया, उसकी चूत की पंखुड़ियाँ पकड़ कर खींच रहा था। मुँह में पूरे बाल जा रहे थे लेकिन उसकी खुशबू मुझे बेकाबू कर रही थी। दीदी की चूत से इतना नमकीन पानी टपक रहा था कि मैं उसे चाटकर और उत्तेजित हो गया।

दीदी अपने मुँह से थूक निकाल निकाल कर लंड को चूस रही थी। इतना कामुक तो एक मर्द भी नहीं होता… मेरे दोस्त सच कहते थे कि लड़कियाँ ज्यादा कामुक होती हैं।

अब मुझसे रहा नहीं गया, मैंने सीधा होकर दीदी की चूत पर लंड टिकाया और जोर से धक्का मारा, फ़ुस्स्स… अंदर गया ही नहीं… मेरा भी पहली बार था और शायद उसका भी!
दीदी ने अब मुझे तेल लाने को बोला और मैंने तेल लाकर दीदी की चूत और अपने लंड पे लगा दिया और दीदी ने हाथ से पकड़ कर लंड को चूत के छेद के पास रखा.

मैंने भी देरी न करते हुए जोर का धक्का मारा और कमाल हो गया एक ही झटके में आधा अन्दर चला गया।
धीरे धीरे मैं लंड को अन्दर बाहर करने लगा और गति बढ़ाने लगा। दीदी भी नीचे से गांड जोर से हिला रही थी, उसकी आँखों से आंसू आ रहे थे और मुँह से आवाज निकल रही थी ‘अह्ह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह्ह… उउइई…’

मैंने दी को एक किस किया और उनसे पूछा- क्या हुआ दीदी, रो क्यों रही हो? मैंने पहले ही बोला था कि यह गलत है.
लेकिन अभी तो दीदी की चुदाई की तमन्ना पूरी हो रही थी, दीदी ने जोर से मेरे होंठों को काटा और बोली- चुप कर बदमाश, सब तो हो गया अब, पहली बार थोड़ा दर्द होता है न इसके वजह से आंसू आ रहे हैं, अब थोड़ी तेजी और बढ़ा… फिर देख कैसा मजा आता है.

अब तो हम दोनों ही जोर जोर से धक्के मार रहे थे एक दूसरे को।
मैं अपनी सीमा पर पहुँच गया था, दीदी के ऊपर पूरा लेट के उनके बालों को कस के पकड़ लिया और जोर लगाने लगा। दीदी ने भी मेरी गांड को कसके पकड़ा और मेरा साथ देने लगी और हम दोनों भी एक साथ झड़ गए।
कुछ देर मैं दीदी के ऊपर वैसे ही लेटा रहा।

मेरे कूल्हे की सारी दवाई निकल गई थी, दीदी ने फिर से थोड़ी दवाई लगाई और वो चाय बनाने चली गई।

वो दिन मुझे आज भी याद है… उसके बाद मुझे कभी भी दीदी की चुदाई का मौक़ा नहीं मिला।

दीदी की भी शादी हो गई और मैं भी जॉब के लिए मुंबई आया था।
अब पूरे तीन साल हुए उस बात को! आज दीदी की चुदाई की यह कहानी लिखी है. मेरी कहानी कैसी लगी?
anuksh1988@gmail.com


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